Wednesday, 28 September 2016

लिखा है मैंने एक आखिरी प्रेम गीत...

ज़िन्दगी की रात में
लिखा है मैंने ,
एक आखिरी प्रेम गीत।

अगर सुनाई दे
तुम्हें ,
तो सुन लेना !

इसे सुन ने की भी
एक शर्त है मगर !

किसी के कहने -सुनने से नहीं ,
अगर मन से सुनो तो ही
सुनना !

यह मेरा प्रेम गीत
नहीं सुनाई देगा
किसी हृदय हीन को !

ह्रदय तल के
आखिरी तल से ,
उभरी टीस से निकला
यह गीत
तुम्हें सुनाई दे .
तो ही सुनना।

जिंदगी की रात है अब ,
भोर का क्या मालूम
हो भी या नहीं।

भोर के तारे में
मेरा गीत ,
सुनाई दे तो सुन लेना।